शिक्षा का अर्थशास्त्र

 शिक्षा के अर्थशास्त्र के कार्य के कुछ प्रमुख विषय- धातु विज्ञान उत्पादन टेक्नोलॉजी, पेट्रोलियम टेक्नोलॉजी और इंजीनियरिंग की अनेक शाखाएं हैं।


स्नातक कोर्स -
स्नातक कोर्सों की अवधि 3 से 4 वर्ष तक की होती है। इसके प्रमुख विषय हैं- धातु एवं खनिज विज्ञान, मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल, केमिकल, टेक्सटाइल एवं एग्रीकल्चरल इंजीनियरिंग।


डिप्लोमा कोर्स-
डिप्लोमा कोर्स की अवधि साधारणतया 3 वर्ष की होती है यह शिक्षा प्रायः पॉलिटेक्निक एवं तकनीकी स्कूलों में दी जाती है। देश में इस समय 400 से अधिक संस्थाएं इस में कार्य कर रही है।


सर्टिफिकेट कोर्स -
सर्टिफिकेट कोर्सो का उद्देश्य कारीगरों को प्रशिक्षण देना है।



Q. कारीगर कितने प्रकार के होते हैं?
कारीगर दो प्रकार के होते हैं। कुशल कारीगर तथा अर्ध कुशल कारीगर।दूसरे प्रकार के कारीगरों के प्रशिक्षण के लिए हमारे देश में कोई विशेष व्यवस्था नहीं है जबकि कुशल कारीगरों को प्रशिक्षण शिक्षा देने के लिए तीन प्रकार की संस्थाएं हैं टेक्निकल स्कूल इंडस्ट्रियल, ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट तथा आर्ट एवं क्राफ्ट स्कूल आदि।


Q. शिक्षा एक निवेश है से आप क्या समझते हैं?
निवेश का अभिप्राय है संपत्ति या शेयर स्टॉक आदि को खरीदने के लिए धन लगाना निवेशक अधिक लाभांश प्राप्त करने के उद्देश्य से पूंजी को लगाता है साथ ही उसका भी यह भी रहता है कि कम से कम जोखिम उठाया जाए और अधिक से अधिक लाभ प्राप्त किया जाए। जेके गेलब्रेथ तथा सैम्यूल हसन ने शिक्षा को एक ठोस निवेश माना है। गेलब्रेथ का मत है मानव की शिक्षा में $1 या रुपया का निवेश राष्ट्रीय आय की वृद्धि में बांध यंत्र मशीन या अन्य वस्तुओं में निवेशक रुपए से अधिक महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है।


Q. आधुनिकीकरण के क्या लक्षण है?
भारतीय संदर्भ में आधुनिकीकरण के निम्नलिखित लक्षण हमारे सामने आते हैं पाश्चात्य विज्ञान एवं तकनीकी को अपनाते हुए भारतीय शिल्प कौशल का विकास करना भारत के प्रत्येक नागरिक को आर्थिक तथा सामाजिक समानता प्रदान करना विशेष रूप से पिछड़े वर्गों को ऊंचा उठाना औद्योगिक तथा विकेंद्रित अर्थव्यवस्था का समन्वित रूप विकसित करना, अंधविश्वास रोड़ी तथा दूषित परंपराओं को बदलकर आधुनिक वैज्ञानिक युग के अनुरूप बनाना तर्कपूर्ण चिंतन का विकास करना भौतिक तथा आध्यात्मिक मूल्यों के बीच उचित संतुलन कायम करना।


Q. शिक्षा का प्रतिफल अथवा लागत से क्या अभिप्राय है?
किस शिक्षा का प्रतिफल निकाला जाए। स्कूल और कालेजों में प्राप्त सामान्य शिक्षा का या संस्थानों और कारखानों में प्राप्त व्यवसायिक एवं तकनीकी शिक्षा का हर स्तर पर अर्थशास्त्री एकमत नहीं है दूसरे अर्थशास्त्री ने कहा है शिक्षा का जो योगदान अर्थशास्त्र की विधियों से निकाला जाता है वह उससे कम या ज्यादा भी हो सकता है कठिनाई तो यह है कि वास्तविक योगदान जानने की कोई शुद्ध विद नहीं है हार विशन और मायर्स का भी मत यह है कि शिक्षा का प्रतिफल निकालना असंभव है जैसे हम किसी बांध या कारखाने से आर्थिक लाभ निकाल लेते हैं वैसे शिक्षा से लाभ नहीं निकाला जा सकता।


Q. शैक्षिक नियोजन को परिभाषित कीजिए?
सी ई बी ई वाई के अनुसार शैक्षिक नियोजन शिक्षा प्रणाली की नीति प्राथमिकताओं तथा लागतो को निर्धारित करने में ऐसी दूरदर्शिता का प्रयोग करना है जिसमें आर्थिक और राजनीतिक वास्तविकता प्रणाली के विकास की संभावना तथा देश और छात्र जिनकी सेवा करने के लिए प्रणाली बनाई गई है का ध्यान रखा जाता है।